Court Marriage Process in Hindi | पढ़िए इसकी पूरी प्रक्रिया

शादी का नाम सुनते ही मन में फूटने वाले लड्डू दिखाई नहीं देते हैं पर महसूस तो किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात आती है कोर्ट मैरिज की तो बहुत से सवाल दिमाग में उठते हैं जैसे की कोर्ट मैरिज होती कैसे है और कोर्ट मैरिज करने का पूरा प्रोसेस क्या है? आम शादियों में आपने देखा होगा लाखों के खर्च करके बैंड बाजा बारात आती है और सैकड़ों बराती के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक बरात ले जाई जाती है। दिन प्रतिदिन डोर बदलते जा रहे हैं और शादी में होने वाले लाखों के खर्च को बचाकर अब लोग कोर्ट मैरिज की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। अब लोग साधारण से कोर्ट मैरिज करने में विश्वास कर रहे हैं इसलिए आज हम आपको अपनी इस पोस्ट के जरिए court marriage process in hindi बताने जा रहे हैं। 

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शादी का नाम सुनते ही मन में फूटने वाले लड्डू दिखाई नहीं देते हैं पर महसूस तो किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात आती है कोर्ट मैरिज की तो बहुत से सवाल दिमाग में उठते हैं जैसे की कोर्ट मैरिज होती कैसे है और कोर्ट मैरिज करने का पूरा प्रोसेस क्या है? आम शादियों में आपने देखा होगा लाखों के खर्च करके बैंड बाजा बारात आती है और सैकड़ों बराती के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक बरात ले जाई जाती है। दिन प्रतिदिन डोर बदलते जा रहे हैं और शादी में होने वाले लाखों के खर्च को बचाकर अब लोग कोर्ट मैरिज की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। अब लोग साधारण से कोर्ट मैरिज करने में विश्वास कर रहे हैं इसलिए आज हम आपको अपनी इस पोस्ट के जरिए court marriage process in hindi बताने जा रहे हैं। 

दरअसल लोग आजकल अपनी शादी का प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी समझते हैं इसलिए कोर्ट की तरफ भागते हैं ताकि कानूनी तौर पर उनकी शादी रजिस्टर हो सके। आम लोग ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े सैलाब्रिटी जैसे जॉन अब्राहम- प्रिया रुंचाल, करीना कपूर और सैफ अली खान, रियान थाम- मिनिषा लांबा आदि। आमतौर पर शादी का प्रमाण पत्र भविष्य में कपल्स के जॉइंट काम में सहायक बनता है जैसे प्रॉपर्टी, इन्वेस्टमेंट, पासपोर्ट, बच्चों की कस्टडी आदि के लिए। 

चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं आखिर कोर्ट मैरिज क्या है?

कोर्ट मैरिज क्या है? Court marriage in hindi

कानून के दायरे में रहकर विशेष विवाह अधिनियम के तहत एक लड़का और एक लड़की की शादी कोर्ट में बिना किसी परंपरागत समारोह के कराई जाती है। मैरिज ऑफिसर के दफ्तर में जाकर एक लड़का और एक लड़की को अपने नाम की रजिस्ट्री कराने होती है कि वह शादी करना चाहते हैं उसके बाद वह वहां जाकर कोर्ट मैरिज कर सकते हैं। वैसे तो कोर्ट मैरिज करने के लिए किसी प्रकार की शर्तों का या नियमों का पालन करना आवश्यक नहीं है परंतु फिर भी कोर्ट मैरिज के कुछ कायदे और कानून है। अपनी इस पोस्ट के जरिए हम आपको Court marriage process in hindi मैं बताएंगे लेकिन उससे पहले कुछ कायदे और कानूनों के बारे में जान लेते हैं:-

  • कोर्ट मैरिज किसी भी धर्म के व संप्रदाय के युवक व युवती के बीच हो सकती है।
  • कोर्ट मैरिज करने के लिए लड़का और लड़की का बालिक होना आवश्यक है।
  • कोई भी धर्म या संप्रदाय से जुड़ा व्यक्ति कोर्ट मैरिज के लिए रजिस्टर कर सकता है
  • लड़का या लड़की विदेशी हो या भारतीय दोनों की आपसी सहमति से कोर्ट मैरिज हो सकती है।
  • किसी भी धर्म के दायरे में रहकर कोर्ट मैरिज नहीं की जाती है इसमें कोई भी भारतीय तरीका नहीं अपनाया जाता है।
  • दोनों पक्षों की सहमति जानने के बाद ही कोर्ट मैरिज की जा सकती हैं।

कोर्ट मैरिज के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने से पहले इस प्रक्रिया में किन सवालों पर गौर किया जाता है आइए जान लेते हैं:- 

  • कोर्ट मैरिज का पंजीकरण अथवा रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन किया जा सकता है?

बिल्कुल भी नहीं रजिस्ट्रेशन के लिए लड़का और लड़की को जाकर मैरिज ऑफिसर के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी होती है तभी उन दोनों का रजिस्ट्रेशन होगा।

2- क्या कोर्ट मैरिज के दौरान लड़का और लड़की के माता-पिता की मंजूरी आवश्यक है?

जी नहीं यदि लड़का और लड़की बालिग हो और कोर्ट मैरिज से संबंधित सभी नियमों का पालन सही तरीके से करें।

कोर्ट मैरिज आज के समय में बहुत आम बात हो गई है इस पोस्ट के जरिए आप court marriage process in hindi के बारे में जान पाएंगे लेकिन उससे पहले कोर्ट मैरिज करने के लिए किन शर्तों का और नियमों का पालन करना आवश्यक है उनके बारे में जान लेते हैं:- 

  • पूर्व में कोई विवाह ना हुआ हो – नियमों के तहत लड़का और लड़की का पहले से कोई भी विवाह ना हुआ हो। दोनों में से किसी भी जोड़े का पति या पत्नी जीवित ना हो।
  • दोनों की सहमति- कोर्ट मैरिज के दौरान हिंदू कम्युनिटी के अनुसार एक ही रिश्तेदार के बच्चे आपस में शादी नहीं कर सकते हैं। शादी के समय लड़का और लड़की दोनों के परिवार की सहमति भी होनी चाहिए और दोनों कानूनी तौर पर रेडी हो।
  • उम्र- कानून के नियमों के अनुसार लड़का और लड़की की शादी की उम्र निर्धारित की गई है जिसके अनुसार लड़का 21 वर्ष की आयु में शादी कर सकता है और लड़की 18 वर्ष से ज्यादा की आयु की हो तो ही शादी कर सकते हैं। दोनों मानसिक रूप से स्वस्थ होने चाहिए।

Court marriage in 1 day कैसे हो सकती है उसके कुछ महत्वपूर्ण चरण इस प्रकार है:- 

आइए अब जान लेते हैं court marriage process in hindi का पहला चरण:- 

  • कोर्ट मैरिज करने से पहले आपको जिले के विवाह अधिकारी के पास जाकर विवाह की सूचना देनी चाहिए। 
  • विवाह की सूचना केवल विवाह में शामिल होने वाले दोनों पक्षों में से किसी व्यक्ति के द्वारा लिखित रूप में देनी होगी।
  • अब सबसे अहम सवाल यह है कि सूचना किसे दी जाए और इसे देने का क्या तरीका है? तो आपको बता दें कि जिला के विवाह अधिकारी के पास जाकर एक व्यक्ति या फिर एक जरूरी नियम के तहत जो लड़का और लड़की विवाह करना चाहते हैं वह 1 महीने पहले से शहर में रह रहे हो तो 30 दिन पहले ही जाकर उन्हें अपने विवाह की सूचना अधिकारी के पास जाकर देनी होगी।
  • सूचना के तौर पर अधिकारी के पास आपकी आयु निवास स्थान आदि से संबंधित प्रमाणिक दस्तावेज जमा कराने होंगे।

Court marriage process in hindi का दूसरा चरण

  • आपके द्वारा दी गई सूचना किसके पास और कहां पहुंचाई जाएगी?

जिले के विवाह अधिकारी जिनके सामने आपके विवाह की सूचना पहुंचाई गई है वहीं सूचना को प्रकाशित करेंगे। सूचना की एक कॉपी कार्यालय के विशिष्ट स्थान पर तथा एक कॉपी उसी जिले के कार्यालय में जहां पर लड़का और लड़की पक्ष स्थाई रूप से रहते हैं वहां पर प्रकाशित की जाएगी। 

Court marriage process in hindi का तीसरा चरण

तीसरे चरण के दौरान आमतौर पर मस्तिष्क में आने वाला सवाल यह है कि विवाह में कौन रुकावट डाल सकता है?

एक विवाह में कोई भी व्यक्ति यानी लड़का या लड़की से संबंध रखने वाले व्यक्ति जिनके पास रुकावट डालने का कोई आधार हो तो वह रुकावट डाल सकते हैं लेकिन उनकी जांच की जाती है। 

विवाह में आपत्ति कहां की जा सकती है?

संबंधित जिले के विवाह अधिकारी के समक्ष जाकर विवाह में होने वाली आपत्ति जताई जा सकती है।

यदि कोई विवाह में आपत्ति जताता है तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं?

यदि किसी लड़का और लड़की के विवाह में कोई आपत्ति जताता है तो विवाह अधिकारी 30 दिन का समय लेकर जांच पड़ताल करता है और इस दौरान विवाह को रोक दिया जाता है और किसी भी तरह की आपत्ति को सही पाया जाता है तो विवाह को स्थगित कर दिया जाता है।

जो आपत्तियां स्वीकार की गई हैं उसका क्या उपाय हो सकता है?

स्वीकार की गई आपत्तियों पर लड़का या लड़की के पक्ष से कोई भी अपील कर सकता है।

अपील किसके पास तथा कब दर्ज की जा सकती हैं?

हनिया जिला न्यायालय में जाकर वहां पर मौजूद विवाह अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आप अपनी अपील दर्ज कर सकते हैं। दर्ज की जाने वाली आपत्ति के स्वीकार होने के 30 दिन भीतर तक ही आपत्ति जताई जा सकती है। 

Court marriage process in hindi का चौथा चरण

कोट मैरिज रजिस्ट्री के बाद प्रश्न उठता है कि घोषणा पर हस्ताक्षर कौन करेगा?

नियमों के तहत विवाह अधिकारी के सामने दोनों पक्ष अर्थात लड़का और लड़की के अलावा तीन गवाह घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करते हैं और साथ ही विभाग अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ यह विवाह संपन्न होता है।

घोषणा का लेख और प्रारूप किस प्रकार का होता है?

घोषणा का संपूर्ण प्रारूप अधिनियम किस अनुसूची 111 में प्रदान किया गया है।

Court marriage process in hindi का पांचवा चरण

  • विवाह का स्थान- विवाह का स्थान का चुनाव कोई भी कर सकता है यदि आप चाहें तो विवाह अधिकारी के कार्यालय या अपने निवास से उचित दूरी के अंदर कोई भी स्थान पर विवाह कर सकते हैं।
  • विवाह का फॉर्म- वर और वधू का विवाह सॉन्ग विवाह अधिकारी की उपस्थिति में स्वीकार किया जा सकता है।

Court marriage process in hindi का छठा चरण

विवाह का प्रमाण पत्र- विवाह संपूर्ण होने के बाद जिलाधिकारी द्वारा मैरिज सर्टिफिकेट पत्र पुस्तिका में एक प्रमाण पत्र दर्ज कराया जाता है। यदि वर और वधू दोनों पक्षों और तीन गवाहों के द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं तो उस सर्टिफिकेट को कोर्ट मैरिज का निर्णायक प्रमाण कहा जाएगा।

कोर्ट मैरिज से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें- 

कोर्ट में शादी कैसे होती है?

कोर्ट में जाकर मैरिज करने से पहले लड़का और लड़की तथा गवाहों को रजिस्ट्रार के सामने एक घोषणापत्र में दस्तखत करने होते हैं जिसमें यह साफ-साफ लिखा होता है कि यह शादी दोनों अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के कर रहे हैं।

क्या कोर्ट मैरिज करने पर सरकार की तरफ से पैसे मिलते हैं?

यदि कोई दलित से अंतरजातीय विवाह करता है तो इस प्रक्रिया के अंतर्गत उस नव दंपत्ति को सरकार की तरफ से ढाई लाख रुपये दिया जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि लड़का यह लड़की में से कोई एक दलित समुदाय का होना चाहिए अथवा दूसरा समुदाय से बाहर का होना चाहिए। डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन फ्रूट इंटर कास्ट मैरिज के तहत यह आर्थिक मदद नव दंपति को दी जाती है। इसके लिए आवश्यक है कि शादी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत कानूनी तौर पर रजिस्टर हो और नव दंपति को राशि प्राप्त के लिए एक हलफनामा भी दाखिल करना होता है।

कोर्ट मैरिज के लिए अप्लाई करने का नियम

  • भारत में रहने वाला कोई भी नागरिक पीरा दी कोर्ट मैरिज करना चाहे तो अप्लाई कर सकता है।
  • कोर्ट मैरिज से पहले रजिस्ट्रार के पास जाकर नोटिस दिया जाता है।
  • कोर्ट मैरिज का नोटिस माता पिता के पास नहीं पहुंचाया जाता बल्कि रजिस्ट्रार के ऑफिस में लगाया जाता है। 

कोर्ट मैरिज के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • संपूर्ण आवेदन पत्र जो पूरी तरह से भरा गया हो और अनिवार्य शुल्क।
  • लड़का और लड़की जो शादी करना चाहते हैं उनके पासपोर्ट साइज 4 फोटोग्राफ
  • लड़का और लड़की के पहचान पत्र ( आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी)
  • प्रत्येक राज्य में कोर्ट मैरिज करने के लिए कोर्ट मैरिज शुल्क अलग-अलग होता है जिसकी शुरुआत 500 से 1000 रुपए होती है। 
  • कक्षा दसवीं/ 12वीं की मार्कशीट या वर वधू का जन्म प्रमाण पत्र।
  • शपथ पत्र जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि दूल्हा-दुल्हन में से कोई भी अवैध रिश्ते में नहीं है
  • विवाह में सम्मिलित होने वाले गवाहों की फोटो तथा उनका पेनकार्ड
  • अगर दोनों में से कोई तलाकशुदा हो तो तलाक के पेपर या फिर पूर्व में पति या पत्नी मृत हो चुके हो तो उनका डेथ सर्टिफिकेट

कोर्ट मैरिज के बाद तलाक

कानूनी तौर पर हुए गए कोर्ट मैरिज के बाद लगभग 1 साल तक दोनों में से कोई भी तलाक नहीं ले सकता है। यदि वे 1 साल के बाद अलग होना चाहे तो खुद ही मामलों में जहां माननीय न्यायालय को यह महसूस होता है कि कठिनाइयों की वजह से दोनों के बीच कुछ वाद विवाद है तब ही तलाक दिया जा सकता है अथवा तलाक की याचिका को खारिज कर दिया जाता है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन (विवाह प्रमाण पत्र)

किसी भी राज्य के कोर्ट में जाकर शादी करने के बाद कोर्ट मैरिज का प्रमाण पत्र मिलता है जिसे नार्मल मैरिज के बाद भी कोर्ट में जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। मैरिज के बाद प्राप्त होने वाला ऑफिशियल सर्टिफिकेट है जो यह दर्शाता है कि लड़का और लड़की आपस में शादीशुदा है। भारत में रजिस्ट्रेशन हिंदू मैरिज एक्ट 1955 या स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत शादियों का ऑफिशियल सर्टिफिकेट दिया जाता है। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने भारत में होने वाली प्रत्येक शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है जिसकी मदद से महिलाओं का अधिकार शादी के बाद और शादी के पहले भी सुरक्षित रखा जा सके।

मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता

किसी भी व्यक्ति की शादी हो जाने के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की आवश्यकता निम्न कामों में पढ़ सकते हैं:- 

  • पासपोर्ट अप्लाई करने के लिए
  • बैंक में नया खाता खोलने के लिए
  • वीजा अप्लाई करने के लिए

अक्सर देखा गया है कि शादी के बाद कुछ कपल्स विदेश में जाकर सेटल हो जाते हैं तो उनके पास उनकी शादी का रजिस्ट्रेशन तथा सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। 

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